Thursday, March 26, 2020

सामदानभेददंडानां व्याख्या। २६ मार्च २०२०

साम,दान,दण्ड,भेद ये चार उपाय का रहस्य वास्तव में क्या है ? 


आचार्य चाणक्य ने कौटिल्य अर्थशास्त्र में द्वितीय अधिकार में शासनाधिकार नामक प्रकरण में साम,दान,दण्ड,और भेद ये चार उपाय दिये है । जो हमारे जीवन में अति महत्त्वपूर्ण उद्देश्यों को पूरा करते है तथा हमारी प्रगति में सहायक बनते है । 

सूत्र :- उपायाः सामोपप्रदानभेददण्डाः । 

१] साम :- साम के पांच प्रकार है । 

१) गुण संकीर्तन :- वंश,शरीर,कार्य,स्वभाव,विद्वत्ता,हाथी,घोड़े आदि के गुणों और अवगुणों को जानकर उनकी प्रशंसा करना ही गुण संकीर्तन है । 

२) सम्बन्धोपाख्यान :- सामानकुल,विवाह,गुरु-शिष्य,पुरोहित-यजमान,वंशपरम्परागत,हार्दिक और मैत्रीपूर्ण आदि सात प्रकार के सम्बन्धो में से किसी एक का कथन करना सम्बन्धोपाख्यान है ।


३) परस्परोपकार संदर्शन :- परस्पर एक दुसरे द्वारा दिए गए उपकार का कथन करना परस्परोपकार संदर्शन कहलाता है। 

४) आयतिप्रदर्शन :- इस कार्य को करने में हम दोनों को ऐसा फल प्राप्त होगा ऐसी आशा करना आयतिप्रदर्शन है । 

५) आत्मोपनिधान :- “जो में हूँ,वहीं आप है तथा मेरा धन हि तुम्हारा धन है,उसे आप ईच्छानुसार अपने कार्य में लगा सकते है । इस आत्म समर्पण की भावना को आत्मोपनिधान कहते है । 


२] दान :- धन आदि के द्वारा उपकार करना दान और उपप्रदान है। 
सूत्र :- उपप्रदानमर्थोपकारः ।


३] भेद :- शत्रु के ह्रदय में शंका भर देना भेद है। 
सूत्र :- शङ्काजननं निर्भत्सनं च भेदः । 



४] दण्ड :- उसे मार देना,उसको पीड़ा पहुँचाना या उसके धन का अपहरण करना दण्ड कहलाता है । 
सूत्र :- वधः परिक्लेशो अर्थहरणं दण्ड इति  । 

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