आज भारतीय संस्कृति के अनुसार नूतन वर्षारंभ तथा चैत्री नवरात्री का प्रथम दिन माँ शैलपुत्री का व्रत पूजन किया जाता है उसके साथ हि आज जगत्कर्ता ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी |
१) माँ शैलपुत्री :-
माँ दुर्गा अपने नवदुर्गा में से पहले स्वरूप में “शैलपुत्री” के नाम से जानी जाती है | अपने पिता पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने से हि इनका नाम “शैलपुत्री” हुआ था | वृषभस्थिता माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाये हाथ में कमल पुष्प सुशोभित है। माता शैलपुत्री की पूजा से शांति और शक्ति की प्राप्ति होती है।
२) ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि रचना :-
नारद पुराण में सनातन जी ने नारद जी से कहते है की, “आज के दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी | आज के दिन उनका व्रत पूजन करने से सर्वसिध्धि प्राप्त होती है |”
१) माँ शैलपुत्री :-
"वन्दे वान्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् |
वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ||”
माँ दुर्गा अपने नवदुर्गा में से पहले स्वरूप में “शैलपुत्री” के नाम से जानी जाती है | अपने पिता पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने से हि इनका नाम “शैलपुत्री” हुआ था | वृषभस्थिता माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाये हाथ में कमल पुष्प सुशोभित है। माता शैलपुत्री की पूजा से शांति और शक्ति की प्राप्ति होती है।
२) ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि रचना :-
नारद पुराण में सनातन जी ने नारद जी से कहते है की, “आज के दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी | आज के दिन उनका व्रत पूजन करने से सर्वसिध्धि प्राप्त होती है |”
“ चैत्रे मासि जगद्ब्रह्मा ससर्ज प्रथमेऽहनि ।
शुक्लपक्षे समग्रं वै तदा सूर्योदये सति ।।
आयुः प्रदापुष्टिकरी धनसौभाग्यवर्द्धिनी ।
मंगल्या च पवित्रा च लोकद्वयमुखावहा ।।
तस्यामादौ तु संपूज्यो ब्रह्मा वह्निवपुर्धरः । द्यार्ध्यपुष्पधूपैश्च वस्त्रालंकारभोजनैः ।।"
( नारदपुराण । अ. ११०)


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