हमारी सनातन हिंदु संस्कृति में कितने कालमान अर्थात् काल की गणना के प्रकार है ?
और कार्तिकादि मास के नाम किन् आधार पर रखे गए है ?
हमारी संस्कृति जो तरह तरह के भिन्न भिन्न विविधता से पूर्ण है | उसमे काल गणना के कई प्रकार है जिसमे से नौ प्रकार निचे दिए गए है |
१) ब्राह्म मान, २) दिव्य मान, ३) पित्र्य मान,
४) प्राजापत्य मान, ५) गौरव मान, ६) सौर मान,
७) सावन मान, ८) चान्द्र मान, ९) नाक्षत्र मान |
१) ब्राह्म मान :- ब्रह्मा के मान को ब्राह्म मान कहा जाता है | १ कल्प ब्रह्मा का एक दिन और एक कल्प ब्रह्मा की एक रात्रि होती है |
२) दिव्य मान :- देवताओं के मान को दिव्य मान कहा जाता है | मानव १ वर्ष = १ दिव्य दिन अर्थात् देवतओं का एक दिन होता है |
३) पित्र्य मान :- पितरों से सम्बन्धित मान को पित्र्य मान कहा जाता है | चन्द्र के उपरी भाग पर स्थित पितरो का १ दिन मानव के १५ दिन का होता है और उतनी हि रात्रि अर्थात् बाद के १५ मानव दिनों की पितरों की १ रात्रि होती है |
४) प्राजापत्य मान :- १४ मनु के मान ( मन्वन्तर व्यवस्था ) को प्राजापत्य मान कहा जाता है |
५) गौरव मान :- गुरु की गति के अनुसार गौरव मान होता है | १ संवत्सर गुरु का १ वर्ष होता है |
६) सौर मान :- सूर्य की गति के अनुसार सौर मान होता है |
७) सावन मान :- कोई एक दिन के सूर्योदय से दुसरे दिन के सूर्योदय का मान एक सावन दिन कहेलाता है |
८) चान्द्र मान :- तिथियोके भोगकाल को चन्द्र दिन कहा गया है |
९) नाक्षत्र मान :- एक नक्षत्र से दुसरे नक्षत्र तक का काल एक नक्षत्र दिन कहेलाता है |
कार्तिकादि मास के नाम उनमे आई हुई पूर्णिमा के दिन जिस नक्षत्र में चंद्र होता है उन नक्षत्रों के नाम के आधार पर है |
उन मास में सभी ( नीचे दिए गए फाल्गुन आदि ३ मास को छोड़कर ) दो दो नक्षत्रो जो पूर्णिमा के दिन भोगे जाते है उनके आधार पर बनते है | यथा – कृत्तिका तथा रोहिणी से कार्तिक मास.
साथ ही अपवाद रूप पंचम मास ( फाल्गुन ), अन्त्य मास (आश्विन), तथा उपान्त्य मास ( भाद्रपद ) ये तीन तीन नक्षत्रो से सम्मिलित होकर बनते है | यथा – रेवती,अश्विनी और भरणी से आश्विन मास.
( संदर्भ ग्रंथ :- सूर्यसिद्धांत )
और कार्तिकादि मास के नाम किन् आधार पर रखे गए है ?
हमारी संस्कृति जो तरह तरह के भिन्न भिन्न विविधता से पूर्ण है | उसमे काल गणना के कई प्रकार है जिसमे से नौ प्रकार निचे दिए गए है |
१) ब्राह्म मान, २) दिव्य मान, ३) पित्र्य मान,
४) प्राजापत्य मान, ५) गौरव मान, ६) सौर मान,
७) सावन मान, ८) चान्द्र मान, ९) नाक्षत्र मान |
१) ब्राह्म मान :- ब्रह्मा के मान को ब्राह्म मान कहा जाता है | १ कल्प ब्रह्मा का एक दिन और एक कल्प ब्रह्मा की एक रात्रि होती है |
२) दिव्य मान :- देवताओं के मान को दिव्य मान कहा जाता है | मानव १ वर्ष = १ दिव्य दिन अर्थात् देवतओं का एक दिन होता है |
३) पित्र्य मान :- पितरों से सम्बन्धित मान को पित्र्य मान कहा जाता है | चन्द्र के उपरी भाग पर स्थित पितरो का १ दिन मानव के १५ दिन का होता है और उतनी हि रात्रि अर्थात् बाद के १५ मानव दिनों की पितरों की १ रात्रि होती है |
४) प्राजापत्य मान :- १४ मनु के मान ( मन्वन्तर व्यवस्था ) को प्राजापत्य मान कहा जाता है |
५) गौरव मान :- गुरु की गति के अनुसार गौरव मान होता है | १ संवत्सर गुरु का १ वर्ष होता है |
६) सौर मान :- सूर्य की गति के अनुसार सौर मान होता है |
७) सावन मान :- कोई एक दिन के सूर्योदय से दुसरे दिन के सूर्योदय का मान एक सावन दिन कहेलाता है |
८) चान्द्र मान :- तिथियोके भोगकाल को चन्द्र दिन कहा गया है |
९) नाक्षत्र मान :- एक नक्षत्र से दुसरे नक्षत्र तक का काल एक नक्षत्र दिन कहेलाता है |
कार्तिकादि मास के नाम उनमे आई हुई पूर्णिमा के दिन जिस नक्षत्र में चंद्र होता है उन नक्षत्रों के नाम के आधार पर है |
उन मास में सभी ( नीचे दिए गए फाल्गुन आदि ३ मास को छोड़कर ) दो दो नक्षत्रो जो पूर्णिमा के दिन भोगे जाते है उनके आधार पर बनते है | यथा – कृत्तिका तथा रोहिणी से कार्तिक मास.
साथ ही अपवाद रूप पंचम मास ( फाल्गुन ), अन्त्य मास (आश्विन), तथा उपान्त्य मास ( भाद्रपद ) ये तीन तीन नक्षत्रो से सम्मिलित होकर बनते है | यथा – रेवती,अश्विनी और भरणी से आश्विन मास.
( संदर्भ ग्रंथ :- सूर्यसिद्धांत )
So deferent and wonderful thought &post
ReplyDeleteThank you very much
DeleteGreat information brother
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